नवल नवेली उर बनी, मृदुल चमेली-माल।
सारी सौंधे सौं सनी, अँगिया फूल-गुलाल॥३०॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
नित्य नव वधू श्री श्यामा के वक्षस्थल पर सुकोमल मल्ली-माल शोभित है। वे सौरभ सिञ्चित साड़ी एवं मृदुल गुलाल-पुष्प निर्मित कञ्चुकी धारण किये हुए हैं