॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 17.3

सभा-मण्डल

कुंडल जमुना कौ जितौ, तितौ आहि बिस्तार।
पंकति कुंजनि की बनी, मंजु मंडलाकार॥३॥