होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 17.3सभा-मण्डल कुंडल जमुना कौ जितौ, तितौ आहि बिस्तार।पंकति कुंजनि की बनी, मंजु मंडलाकार॥३॥