रँगी रंग-अनुराग सौं, पगी दुहुँनि के प्यार।
और न कछू सुहाइ मन, जीवन युगल-बिहार॥२४॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
श्री युगल के प्रेम प्यार से पगी एवं उनके अनुराग-रस में रँगी इन सखियों को अन्य कुछ रुचिकर नहीं है। श्री युगल का प्रेम-विहार ही उनका जीवन है