॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 17.73

सभा-मण्डल

चंप चमेली केतकी, वासंती रस ऐंन।
बेलि गुलाली सेवती, सेवत हैं दिन-रैंन॥७३॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

गुलाली और सेवती लता रूपी सखियाँ युगल की अहर्निश सेवा किया करती हैं