॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 17.161

सभा-मण्डल

नित्य-विहार विवाह नित, दुलहिनि-दूलहु लाल।
नित्य सखी सुख सहजही, लेत रहतिं सब काल॥१६१॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

नित्य नव दम्पति का नित्य विहारमय विवाह नित्य है, जिसका सहचरियाँ सर्वकाल सुखास्वादन करती रहती हैं