नित्य-विहार विवाह नित, दुलहिनि-दूलहु लाल।
नित्य सखी सुख सहजही, लेत रहतिं सब काल॥१६१॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
नित्य नव दम्पति का नित्य विहारमय विवाह नित्य है, जिसका सहचरियाँ सर्वकाल सुखास्वादन करती रहती हैं