॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 17.182

सभा-मण्डल

कंज-दलनि पर रुचिर कल, करत्ति निर्त्त सुकुँवारि।
तिहिं छिन जहाँ लगि सहचरी, चकित ह्वै रहीं निहारि॥१८२॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

सुकुमारी प्रिया कमल के दलों पर अति सुन्दर नृत्य करने लगीं, उनकी नृत्य की विलक्षण गतियों को देखकर समस्त सखियाँ जकी-थकी सी रह गर्यीं