होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 17.189सभा-मण्डल मान सरोवर रसमयी, झलकत निर्मल नीर।नव किसोर इक बैस द्रुम, रतन-खचित वर तीर॥१८९॥