॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 1.12

जीव-दशा

रंच न स्याम भक्ति उर आई। या दुख में अब कौन सहाई॥१२॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

वाणी अवरुद्ध हो गयी फिर तो पछताने के सिवाय और कुछ वश का नहीं रहा॥।१०॥उसी समय अत्यन्त भयानक यम-दूतों ने उसकी अन्तरात्मा को घेर लिया । यह दुःख में दु:ख आ पड़ा । ११॥यदि कभी जीवन में श्याम-सुन्दर श्री कृष्ण की थोड़ी सी भी भक्ति की होती, तो वह आज जीवन के अन्तिम क्षणों में सहायक होती परन्तु भक्ति के अभाव में अब उस भक्ति-विमुख जीव की सहायता कौन करेगा ?