रंच न स्याम भक्ति उर आई। या दुख में अब कौन सहाई॥१२॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
वाणी अवरुद्ध हो गयी फिर तो पछताने के सिवाय और कुछ वश का नहीं रहा॥।१०॥उसी समय अत्यन्त भयानक यम-दूतों ने उसकी अन्तरात्मा को घेर लिया । यह दुःख में दु:ख आ पड़ा । ११॥यदि कभी जीवन में श्याम-सुन्दर श्री कृष्ण की थोड़ी सी भी भक्ति की होती, तो वह आज जीवन के अन्तिम क्षणों में सहायक होती परन्तु भक्ति के अभाव में अब उस भक्ति-विमुख जीव की सहायता कौन करेगा ?