होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 18.34रस-मुक्तावली दामिनि-सत-दुति देह की, अधिक प्रिया सौं हेत।तारा-मंडल से बसन, पहिरैं अति सुख देत॥३४॥