॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 18.34

रस-मुक्तावली

दामिनि-सत-दुति देह की, अधिक प्रिया सौं हेत।
तारा-मंडल से बसन, पहिरैं अति सुख देत॥३४॥