॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 3.40

मन-शिक्षा

नव किसोर सुकुँवार तन, रँगे प्रेम के रंग।
जिनकै हिय में बसत ध्रुव, तिन सौं करि ध्रुव संग॥४०॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि जिनके हृदय में नित्य निरन्तर प्रेम रङ्ग रञ्जित नवल किशोर सुकुमार वपु श्री श्यामा-श्याम निवास करते हैं, उपासक को उन्हीं का सङ्ग करना चाहिये