॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 18.144

रस-मुक्तावली

दसननि अधर रही धरि प्यारी। करुना रस की निधि सुकुमारी॥१४४॥