॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 18.173

रस-मुक्तावली

दूध-भात मधु अति रुचिकारी। जल सुगंध भरि आनी झारी॥१७३॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

दूध, भात रुचिकर मिष्ठान्न तथा सुवासित जल की झारी युगल के सम्मुख उपस्थित की