दूध-भात मधु अति रुचिकारी। जल सुगंध भरि आनी झारी॥१७३॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
दूध, भात रुचिकर मिष्ठान्न तथा सुवासित जल की झारी युगल के सम्मुख उपस्थित की
दूध-भात मधु अति रुचिकारी। जल सुगंध भरि आनी झारी॥१७३॥
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
दूध, भात रुचिकर मिष्ठान्न तथा सुवासित जल की झारी युगल के सम्मुख उपस्थित की