॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 19.80

रस-हीरावली

षटरितु बरनौं जुगल हित, बहु विधि करत विहार।
रितु-रितु कौ सुख कहौं कछु, अपनी मति अनुसार॥८०॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

श्री धरुवदास जी कहते हैं कि अब मैं रसिक युगल ललित लाड़िली-लाल के षट्‌-ऋतु विहार में जो बहुत प्रकार का है , अपनी बुद्धि के अनुसार प्रत्येक ऋतु का सुख-विलास वर्णन करूँगा