होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 21.72प्रेमावली नैंन अधर कुच कर चरन, झलकत नये तरंग।कनक बेलि मनौं फूलि रही, नख-सिख कमल सुरंग॥७२॥