प्रेम मदन कौ सुख जहाँ, सहज प्रेम सिंगार।
आदि मध्य अवसान इक, इक रस विमल विहार॥१०७॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
वृन्दावन के नित्य-विहार देश में प्रेमी रूपी मदन का सुख युगल प्रेम का सहज शृङ्गार है । इसके आदि-मध्य-अवसान में विशुद्ध प्रेम ही विहार रूप है