फूले फिरत मधुप मदमाते। जलजनिं सौरभ के रस राते॥१२॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
यमुना के तट प्रान्त में जहाँ-तहाँ पुलिन-स्थलियों में कमल-पुष्प विकसित हैं , जिनकी छवि देखकर ऐसा लगता है कि वृन्दावनीय रसिक-परिकर के मनोरथ ही पुष्पित हो गये हों । ११॥दोहा सखियों का तत्सुख प्रेम चौपाई उन विकसित कमल-पुष्पों की सुवास रस से उन्मत्त हुए भ्रमर उन पर सदा मॅँडराते रहते हैं