॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 23.88

रहस्य-मञ्जरी

ललित विसाखा सखी पियारी। दंपति सुख मन समुझनि हारी॥८८॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

नवल किशोरी प्रिया की प्राण-प्रिय सहचरियाँ श्री ललिता-विशाखा ही दम्पति के आभ्यन्तर सुखों को समझने में समर्थ हैं