॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 4.29

श्री वृन्दावन शत

गौर स्याम तन मन रँगे, प्रेम स्वाद रस सार।
निकसत नहिं तिहिं ऐंन तें, अटके सरस विहार॥२९॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

रससार प्रेम के आस्वादन में तन-मन रँगे और सरस विहार में ही अटके गौर-श्याम युगल श्री वृन्दावन धाम से कभी बाहर निकलते ही नहीं हैं