॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 25.56

रति-मञ्जरी

ऐसै जतननि पियहि जगावै। रति नागरि रति केलि बढ़ावै॥५६॥