तबहि कुँवरि भरि लिये अँकवारी। करुना करि दियौ अधर सुधारी॥१०५॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
तब कुँवरि किशोरी ने द्रवित होकर उन्हें अपने बाहु-पाश में भर लिया और करुणा करके अधरामृत-रस का दान किया