॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 26.105

नेह-मञ्जरी

तबहि कुँवरि भरि लिये अँकवारी। करुना करि दियौ अधर सुधारी॥१०५॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

तब कुँवरि किशोरी ने द्रवित होकर उन्हें अपने बाहु-पाश में भर लिया और करुणा करके अधरामृत-रस का दान किया