॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 26.115

नेह-मञ्जरी

समुझि सनेह नैंन भरि आये। मनौ कंज आनँद जल छाये॥११५॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

अपने प्रति श्री प्रिया के गम्भीर प्रेम का अनुभव करके प्रियतम के नेत्र छल-छला उठे । उस समय अश्रु-कण बरसते नेत्रों की छबि ऐसी लगी,मानो अरुण कमलों पर आनन्द रूपी जल छा गया हो