होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 26.118नेह-मञ्जरी देखत-देखत हँसत ही, गये कलप बहु बीति।पल समान जाने नहीं, बिलसत दिन यह रीति॥११८॥