॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 26.120

नेह-मञ्जरी

नित्त प्रेम एकै रस धारा। अति अगाध तेहि नाहिंन पारा॥१२०॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

युगल का यह नित्य प्रेम एक विलक्षण रस की धारा है, जो कभी न्यून नहीं होती। यह रस-धारा अत्यन्त गम्भीर, अथाह एवं अपार है