प्रेम बात कछु कही न जाई। उलटी चाल तहाँ सब माई॥१२४॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
[प्रेम परम तत्त्व है , वह समस्त अनुबन्धों , प्रतिबन्धों एवं मर्यादाओं से उन्मुक्त है । वह ईश्वर का भी ईश्वर है] प्रेम की इदम् इत्थं अर्थात् प्रेम यह है, प्रेम ऐसा है, व्याख्या या परिभाषा कर सकना कठिन है॥प्रेम की गति लोक-वेद विलक्षण है