फूलि-फूलि फूली फिरैं, देखत जहँ-तहँ फूल।
झलमलात दीपावली, मनिमय जमुना-कूल॥२२॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
श्रीवन में व्याप्त प्रफुल्लता को देखकर ऐसा लगा, मानो तटवर्त्ती मणिमयी दीपावली झलमलाहट के द्वारा अपनी प्रसन्नता प्रकट करने लगी