॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 28.29

रङ्ग-विहार

उपमा सुंदर चिबुक की, सकत न उर में आनि।
सोभा निधि अद्भुत मनौं, हरि-मन हीरा-खानि॥२९॥