॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 30.26

रङ्ग-हुलास

नवल सखी छवि नई-नई, अंग-अंग झलकंत।
मनु सुहाग अनुराग की, सींव सुरँग सीमंत॥२६॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

इस नयी सखी की नयी-नयी शोभा उसके अङ्ग-प्रत्यङ्ग से झलकती हुई यह प्रकट करने लगी कि वह अपनी अरुणिम सीमन्त रेखा के द्वारा अनुराग और सुहाग की चरम एवं परम अवधि है