होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 33.38रहस्य-लता कबहुँ बात मुसिकात बिच, फिरि-फिरि फिरि लपटात।ऐसै रंग बिहार में, तदपि न सखी अघात॥३८॥