अरु ताके अँग-सँग की बातैं। प्यारी लगत सबै तेहि नातैं॥१५॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
और उसे अपने प्रियतम के अङ्ग-सङ्ग की सभी बातें इस लिए प्रिय लगती हैं कि उसका अपने उस प्रियतम से आत्मिक सम्बन्ध होता है