कुंदन-दुलरी कंठ सुहाई। मनौं रूप की सींव बनाई॥४२॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
पाठान्तर -१ तजी कण्ठ पर कुन्दन की दुलरी क्या है, मानो रूप की सीमा-रेखा है
कुंदन-दुलरी कंठ सुहाई। मनौं रूप की सींव बनाई॥४२॥
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
पाठान्तर -१ तजी कण्ठ पर कुन्दन की दुलरी क्या है, मानो रूप की सीमा-रेखा है