श्यामा चीर विविध नव-रंगा। लियैं रहति अनुराग अभंगा॥७३॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
“श्यामा” सखी अभङ्ग अनुराग से भरी रहकर युगल के धारण करने योग्य विविध प्रकार के वस्त्र लिये सेवा में तत्पर रहती है