॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 37.73

रसानन्द

श्यामा चीर विविध नव-रंगा। लियैं रहति अनुराग अभंगा॥७३॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

“श्यामा” सखी अभङ्ग अनुराग से भरी रहकर युगल के धारण करने योग्य विविध प्रकार के वस्त्र लिये सेवा में तत्पर रहती है