॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 37.80

रसानन्द

बिच-बिच मंद-मंद सुर गावै। सुनत हिये के श्रवन सिरावै॥८०॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

बीच-बीच में मन्द-मन्द गान करती हैं, जिसे सुनकर युगल के अन्तर्मन के श्रवण शीतल हो जाते हैं