खेलत नवल नागरी-नाइक। चौपर-खेल महा सुखदायक॥८५॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
आज नवल नागरी श्री राधा और नवल नायक श्री लालजी महान् सुखदायक खेल चौपड़ खेल रहे हैं
खेलत नवल नागरी-नाइक। चौपर-खेल महा सुखदायक॥८५॥
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
आज नवल नागरी श्री राधा और नवल नायक श्री लालजी महान् सुखदायक खेल चौपड़ खेल रहे हैं