॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 37.105

रसानन्द

अरुन असित-सित अंबुज सोहैं। चलत मराल मंद-गति मोहैं॥१०५॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

सरोवर में श्वेत, नील एवं लाल रङ्ग के अनेक कमल विकसित हो रहे हैं, जिनमें मद-मन्थर गतिशील मराल (हंस) क्रीड़ा कर रहे हैं, जो युगल के मन को मोहित कर रहे हैं