अरुन असित-सित अंबुज सोहैं। चलत मराल मंद-गति मोहैं॥१०५॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
सरोवर में श्वेत, नील एवं लाल रङ्ग के अनेक कमल विकसित हो रहे हैं, जिनमें मद-मन्थर गतिशील मराल (हंस) क्रीड़ा कर रहे हैं, जो युगल के मन को मोहित कर रहे हैं