निर्त्तत फिरत किसोर-किसोरी। मधुर वचन कहि हो-हो होरी॥१११॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
इनके बीच में युगल किशोर 'हो हो होरी' के मधुर शब्द बोलते हुए नृत्य कर रहे हैं
निर्त्तत फिरत किसोर-किसोरी। मधुर वचन कहि हो-हो होरी॥१११॥
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
इनके बीच में युगल किशोर 'हो हो होरी' के मधुर शब्द बोलते हुए नृत्य कर रहे हैं