॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 37.154

रसानन्द

यह सुख तौ नैंना ही जानैं। रसना हित ध्रुव कहा बखानैं॥१५४॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि इस सुख को तो केवल नेत्र ही जानते हैं । बेचारी जिल्ला क्या वर्णन करे