॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 5.11

ख्याल हुल्लास

जहाँ-जहाँ चित लागि है, तहाँ तहाँ दुख रासि।
जब लगि मन परि है नहीं, युगल प्रेम की पासि॥११॥