होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 5.11ख्याल हुल्लास जहाँ-जहाँ चित लागि है, तहाँ तहाँ दुख रासि।जब लगि मन परि है नहीं, युगल प्रेम की पासि॥११॥