उत देख्यौ इक कौतिक भारी। सुंदर सर अंबुज छबि न्यारी॥२६॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
त्यौं ही उन्होंने देखा। सुन्दर सरोवर में विकसित कमलों की छवि विलक्षण है
उत देख्यौ इक कौतिक भारी। सुंदर सर अंबुज छबि न्यारी॥२६॥
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
त्यौं ही उन्होंने देखा। सुन्दर सरोवर में विकसित कमलों की छवि विलक्षण है