॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 38.103

ब्रज-लीला

वहै करक तब तें मन माहीं। खटकति पल-पल निकसति नाहीं॥१०३॥