सैंन बूझि लालन उठि आये। ललिता देखि कछुक मुसिकाये॥११२॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
सखी का सङ्केत पाकर श्री लाल जी समीप आये एवं ललिता जी का दर्शन पाकर प्रसन्न हो उठे
सैंन बूझि लालन उठि आये। ललिता देखि कछुक मुसिकाये॥११२॥
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
सखी का सङ्केत पाकर श्री लाल जी समीप आये एवं ललिता जी का दर्शन पाकर प्रसन्न हो उठे