॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 38.112

ब्रज-लीला

सैंन बूझि लालन उठि आये। ललिता देखि कछुक मुसिकाये॥११२॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

सखी का सङ्केत पाकर श्री लाल जी समीप आये एवं ललिता जी का दर्शन पाकर प्रसन्न हो उठे