॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 40.17

नृत्य-विलास

अति सुकुँवारि निर्त्त रँग भीनी। भाइ भेद गति लेति नवीनी॥१७॥