होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 41.21मान-लीला जब जान्यौ कछु मन भयौ, चतुर चित्त की पाइ।ल्यावन प्यारे लाल कौं, तेहि छिन आई धाइ॥२१॥