॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 6.31

भक्त-नामावली

घमंडी रस में घमड़ि रहयौ, वृंदावन निज धाम।
बंशीवट-तट वास किय, गाये स्यामा-स्याम॥३१॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

घमण्डी अर्थात्‌ घमण्डदेवाचार्य वृन्दावन-रस में रम गये थे, उन्होंने श्री श्यामा-श्याम का भजन, गान, चिन्तन करते हुए श्री वृन्दावन धाम में वंशीवट के समीप यमुनातट पर वास किया