॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 7.2

वृहद् वामन पुराण कथा

एक समै भृगु पिता सौं, प्रश्न करी यह आनि।
करि प्रनाम ठाढ़ौ भयौ, आगैं जोरे पानि॥२॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

एक समय ब्रह्मा जी के सुपुत्र महर्षि भृगु अपने पिता जी के सम्मुख आ उपस्थित हुए एवं प्रणाम करके कर-बद्ध भाव से उनसे पूछने लगे