॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 9.42

प्रीति-चौवनी

पर्यौ न रूप-तंरग में, अर्यौ न मृदु मुसिक्यान।
रम्यौ न भौंहनिं भाइ-रस, नीरस तरु सम जान॥४२॥