॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 9.48

प्रीति-चौवनी

चित्त रहै द्रविभूत नित, अति कोमल रस-प्रेम।
हिय में झलकत रहैं यौं, जैसैं चाँदी-हेम॥४८॥