॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 11.8

भजनाष्टक

बिवस भयौ सुधि रही न कछु, मोह्यौ महा अनंग।
लज्जित ह्वै रह्यौ नमित अति, करत न सीस उतंग॥८॥