होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 11.8भजनाष्टक बिवस भयौ सुधि रही न कछु, मोह्यौ महा अनंग।लज्जित ह्वै रह्यौ नमित अति, करत न सीस उतंग॥८॥