तबहिं बैद तासौं यौं कही। करौ जतन दुख जैहै सही॥२८॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
रोगी के रोग का निदान करके उससे वैद्यराज ने कहा-देखो तुम्हारा रोग साध्य है। औषध-उपचार का यत्न करने से रोग की निवृत्ति सम्भव है