॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 13.98

भजन-शत

भूलिहुँ मन दीजे नहीं, भक्तनि-निंदा ओर।
होत अधिक अपराध यह, यौं मत जानहु थोर॥९८॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

अतएव, भूलकर भी कभी भक्तों की निन्दा में रुचि नहीं लेनी चाहिये । यह बहुत बड़ा अपराध है, ऐसा जानना चाहिये