सारी हरी ने हर्यौ मन लाल कौ, मोहनी सोहनी के तन सोहै।
अंगिया लाल सुरंग बनी लहि, गातहि रंग खरौ मन मोहै॥
रूप की रासि सबै गुन आगरि, या छबि की उपमा कहौ कोहै।
राजति है 'ध्रुव' कुंज बिहारिनि, सो छबि लाल पलौ पल जोहै॥१४॥
सारी हरी ने हर्यौ मन लाल कौ, मोहनी सोहनी के तन सोहै।
अंगिया लाल सुरंग बनी लहि, गातहि रंग खरौ मन मोहै॥
रूप की रासि सबै गुन आगरि, या छबि की उपमा कहौ कोहै।
राजति है 'ध्रुव' कुंज बिहारिनि, सो छबि लाल पलौ पल जोहै॥१४॥